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Nartiang Durga Temple : नर्तियांग दुर्गा शक्तिपीठ मंदिर का इतिहास, प्रसाद व्यवस्था, आरती, दर्शन का समय, नीति नियम और त्यौहार

हनुमान न्यूज़ में आपका स्वगत है। यहां पर आपको इस नर्तियांग दुर्गा मंदिर (Nartiang Durga Temple) से जुड़ी हर जानकारी मिलेगी। जैसे की मंदिर का इतिहास, पूजा का समय, आसपास घूमने की अच्छी जगह, जाने का बेहतरीन समय और भी बहुत कुछ।

मेघालय स्थित श्री नर्तियांग दुर्गा मंदिर गहन आध्यात्मिक भक्ति और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। सदियों पुराना और पवित्र शक्तिपीठों में से एक माना जाने वाला यह मंदिर, आगंतुकों को हिंदू पौराणिक कथाओं और धार्मिक परंपराओं की गहन यात्रा कराता है।अपने धार्मिक महत्व के अलावा, मंदिर का शांत परिवेश और विस्तृत दृश्य इसकी सुंदरता को और बढ़ाते हैं, यह एक ऐसा स्थान प्रदान करता है जहाँ इतिहास, आध्यात्मिकता और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम होता है। चाहे आप त्योहारों में शामिल हों, स्थानीय कहानियाँ सीखें, या बस शांत वातावरण का आनंद लें, इस मंदिर के दर्शन एक यादगार और समृद्ध अनुभव सुनिश्चित करते हैं। इन सब के बारे में और गहन जानकारी आपको आगे प्राप्त होगी।

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नर्तियांग दुर्गा मंदिर के बारे में जानकारी

नार्तियांग दुर्गा मन्दिर 51 शक्तिपीठों में से एक मंदिर है जो मेघालय राज्य के पश्चिम के जयन्तिया हिल्स ज़िले में स्थित एक 600 वर्ष पुराना मन्दिर है। भारत में एक समुदाय है जिसका नाम है प्नार समुदाय यह समुदाय के लोग विशेष रूप से जयन्तिया पहाड़ी को एक तीर्थ स्थल स्वरूप मानते हैं न केवल यह समुदाय के लोग परंतु देशभर के श्रद्धालुओं के लिए दुर्गा पूजा करने के लिए यह प्रमुख स्थान माना जाता है। नार्तियांग की शक्ति को जयंती के रूप में पूजा जाता है माना जाता है कि यहां देवी सती की बाई जांघ गिरी थी।

नर्तियांग दुर्गा मंदिर का इतिहास (History of Nartiang Durga Temple)

जयंतिया के राजा धन माणिक ने 1596-1612 के दौरान यानी की ने लगभग 600 वर्ष पूर्व नार्तियांग को जयंतिया साम्राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया था। जयंतिया के राजा जसो माणिक 1606-1641 के बीच हिंदू कोच राजा नर नारायण की पुत्री लक्ष्मी नारायण से विवाह किया था। ऐसा माना जाता है कि उनकी पत्नी लक्ष्मी नारायण ने ही जयंतिया राजघराने के राजा जसो माणिक और उनके गोत्र को हिंदू धर्म के शक्ति संप्रदाय को अपनाने के लिए प्रेरित किया था क्योंकि वह स्वयं देवी दुर्गा की परम भक्त थीं।

एक प्रचलित दंत कथा के अनुसार, एक रात देवी ने जसो माणिक को स्वप्न में दर्शन दिए और अपने और जगह के महत्व के बारे में बताया साथ ही इस जगह एक मंदिर बनाने को कहा। इसके बाद, नार्तियांग में जैंतेश्वरी मंदिर की स्थापना की गई। मंदिर की संरचना देखने के बाद यह पता चलता है कि मंदिर राजाओं के किले का हिस्सा रहा होगा।

नर्तियांग दुर्गा मंदिर में प्रसाद व्यवस्था

यह मंदिर भारत के उन चुनिंदा मंदिरों में से एक है जहां पर पशु बलि दी जाती है। इस मंदिर के अनुष्ठानों में पशु बलि की प्रथा एक प्रमुख हिस्सा है कई वर्षों पहले मानव बलि की प्रथा थी लेकिन अंग्रेजों ने इस प्रथा पर प्रतिबंध लगा दिया था। आजकल बकरियां और बत्तखों की बलि दी जाती है और अनुष्ठान से पहले बकरियों को मानव मुखोटे पहनाए जाते हैं।

दूसरी तरफ यहां केले के पत्तों की पूजा की जाती है वार्षिक दुर्गा पूजा के दौरान किले के पौधों को देवी के रूप में सजा कर उनकी पूजा की जाती है त्योहार के बाद इसे मिंटडू नदी में औपचारिक रूप से विसर्जित कर दिया जाता है। नार्तियांग की प्रसाद प्रणाली हिंदू और खासी जनजातीय रीति-रिवाजों के मिश्रण से काफी प्रभावित है।

नर्तियांग दुर्गा मंदिर में आरती और दर्शन का समय

सामान्य रूप से मंदिर का समय सुबह 6 से दोपहर 12:00 तक और दोपहर 3 से रात 9:00 बजे तक होता है लेकिन खास त्यौहारों के दौरान समय में बदलाव हो सकता है। मंदिर में तकरीबन सुबह 7:00 बजे उषाकाल पूजा दोपहर लगभग 11:30 बजे उच्चकाल पूजा और शाम 6:30 बजे और 7:30 बजे दो संध्याकालीन पूजा होती है।

नर्तियांग दुर्गा मंदिर के नीति नियम

मंदिर के कुछ नियम है जो आमतौर पर सभी हिंदू मंदिरों में होते हैं जैसे शालीन कपड़े पहनना यानी कि कंधे और घुटने ढक जाए वैसे कपड़े पहनना।फोटोग्राफी करने से पहले अनुमति ले, मंदिर के आंतरिक गर्भ ग्रुप में प्रवेश करने से पहले अपने जूते उतारे जैसे सामान्य नीति नियम है।

नर्तियांग दुर्गा मंदिर के त्यौहार

नार्तियांग शक्तिपीठ में मनाया जाने वाला एक मुख्य त्यौहार है दुर्गा पूजा जो खासी और बंगाली परंपराओं के साथ अनोखे ढंग से मनाया जाता है। त्योहार के दौरान मां की मूर्ति की पूजा ना करते हुए यहां देवी का प्रतिनिधित्व करने के लिए गेंदे के फूलों से सजे केले के तनो की पूजा की जाती है। इस उत्सव में स्थानीय सरदार द्वारा बलिदान पारंपरिक मंत्रोचार और तोपों की सलामी के साथ केले के तने को मिंटडू नदी में औपचारिक रूप से विसर्जित करने के साथ समापन होता है।

नर्तियांग दुर्गा मंदिर के आसपास घूमने की जगह

(1) नार्तियांग मोनोलिथ:

नार्तियांग मोनोलिथ मेघालय के पश्चिम जयंतिया हिल्स में स्थित ऐतिहासिक पत्थर की संरचनाओं का एक विशाल संग्रह है जो जयंती या राजाओं की ग्रीष्मकालीन राजधानी थी। यह 1500 ईस्वी 1835 ईस्वी के बीच में विभिन्न उद्देश्यों के लिए बनाए गए थे और इन्हें क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के रूप में देखा जाता है। जहां पर आने के लिए शिलांग से आपको सड़क मार्ग की व्यवस्था उचित रहती है। शिलांग से यह जगह तकरीबन 60 किलोमीटर की दूरी पर है। शिलांग में आपको हवाई अड्डा और रेलवे स्टेशन मिल जाएंगे जहां पर आप भारत के किसी भी कोने से आ सकते हैं।

(2) थाडलस्केइन झील:

थाडलस्केइन झील पश्चिम जयंतिया हिल्स जिले में स्थित एक कृत्रिम और ऐतिहासिक झील है जो लोकप्रिय पर्यटक आकर्षण है। यह राष्ट्रीय राजमार्ग 6 के पास स्थित है और एक शांत सरगम स्थान है जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और स्थानीय किंवदंतियों के लिए जाना जाता है। इसे स्थानीय रूप से “पुंग सागर नागली” के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस झील का निर्माण मध्ययुगीन काल में अत्याचारी शासन के सामने विद्रोह करने के लिए सागर नांगली नामक एक सरदार और उसके अनुयायियों ने किया था।

यह झील खासी हाइलैंड्स की हरी भरी पहाड़ियों से घिरी हुई है जिसकी वजह से यहां शांतिपूर्ण वातावरण मिलता है।यह स्थल स्थानीय पिकनिक मनाने वाले लोगों के बीच मशहूर है साथ ही साथ इस दिल में नौका विहार की सुविधा भी उपलब्ध है। इस झील में विभिन्न प्रकार की मछलियां है जिसकी वजह से मछलियां पकड़ने का शौक रखने वाले लोग इस झील में अक्सर आकर मछलियां पकड़ते हैं।इस झील के पास जोवाई शहर में ठहरने के लिए विभिन्न प्रकार के आवास आपको मिल जाएंगे।

(3) जिंगकिएंग नोंग्रियाट:

जिंगकिएंग नोंग्रियाट एक पूर्वी खासी हिल्स में प्रसिद्ध जीवित जड़ पुल है। यह अलग-अलग प्रकार के पुल नहीं है बल्कि विशिष्ट स्थान या प्रतिष्ठित संरचनाओं को दर्शाते हैं। यह जैव संरचना द्वारा निर्मित है, फ़िकस इलास्टिका वृक्ष की जड़ों से उगाए गए हैं और मेघालय के सबसे प्रसिद्ध प्राकृतिक और सांस्कृतिक चमत्कारों में से एक हैं।

मेघालय के जीवित जड़ असल पुल में है क्या?

यह नदियों और नालों पर रबर फिग के पेड़ की हवाई जड़ों को निर्देशित और बुनकर बनाए गए प्राकृतिक हस्तनिर्मित फूल है।इसे बनाने के लिए नदी के विपरीत किनारों पर दो फ़िकस इलास्टिका के पेड़ लगाना। अस्थायी मचान के रूप में सुपारी के ताड़ के तने या बाँस जैसी विधियों का उपयोग करके जड़ों को नदी के पार बढ़ने के लिए निर्देशित करना।इस प्रक्रिया को खत्म होने में 10 से 15 साल का समय लग सकता है और बढ़ती जड़ों से पुल लगातार मजबूत होते रहते हैं।

इसमें कई सारे प्रसिद्ध उदाहरण शामिल है जैसे की उमशियांग डबल-डेकर रूट ब्रिज: नोंग्रियाट गाँव में स्थित एक प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित उदाहरण।

जिंगकिएंग नोंग्रियाट: नोंग्रियाट में डबल-डेकर रूट ब्रिज का स्थानीय खासी नाम। यह सांस्कृतिक महत्व रखते हैं क्योंकि इंजीनियरिंग, प्रकृति और स्थानीय खासी लोगों और उनके पर्यावरण के बीच गहरे रिश्ते का एक अनूठा मिश्रण दर्शाते हैं। साथ ही साथ ये जीवंत पुल अविश्वसनीय रूप से मज़बूत होते हैं और कई शताब्दियों तक टिके रह सकते हैं, और जैसे-जैसे ये बढ़ते हैं, ये और भी मज़बूत होते जाते हैं।

(4) क्रांग सुरी झरना:

क्रांग सुरी झरना मेघालय के जयंतिया हिल्स जिले में स्थित एक खूबसूरत झरना है जो अपनी क्रिस्टल क्लियर नीली हरी पानी की झील के लिए जाना जाता है। यहां का पानी बेहद शुद्ध है जैसे की कोई कांच क्यों ना हो यह झरना लगभग 40 मीटर ऊंचा है और पर्यटकों को तेरा की फोटोग्राफी और कैंपिंग के लिए आकर्षित करता है।

जयंतिया हिल्स जिला मेघालय की राजधानी शिलांग से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर है। इसके मुख्य विशेषताओं में एक यह बेहतरीन बात है कि इसका पानी बेहद ही साफ और नीला हरा होता है जिससे कि सूर्य की रोशनी में इंद्रधनुष का प्रभाव दिखता है। साथ ही इसके नीचे एक प्राकृतिक कुंड है जो तैरने के शौकीन लोगों के बीच बेहद प्रिय स्थल है। जंगल के शौकीन लोगों के लिए यह स्वर्ग से काम नहीं है क्योंकि चारों तरफ इसके सिर्फ जंगल है। अगर आप यहां जाते हैं तो स्थानीय लोगों से मिलना और स्थानीय भोजन करना बिल्कुल ना चुके।

(5) मूक्यंदुर व्यू पॉइंट:

मूक्यंदुर व्यू पॉइंट मेघालय में स्थित एक खूबसूरत पर्यटन स्थल है जो प्राकृतिक प्रेमियों और शांत वातावरण की तलाश करने वाले लोगों के लिए बेहतरीन स्थल है। यह मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स जिले में स्थित है।

(6) डेविड स्कॉट स्मारक:

चेरापूंजी में स्थित, डेविड स्कॉट स्मारक, डेविड स्कॉट को समर्पित एक स्तंभ है। स्कॉट एक ब्रिटिश प्रशासक थे जिन्होंने 19वीं शताब्दी के आरंभ में इस क्षेत्र में व्यापार मार्ग खोले थे। यह ग्रेनाइट स्मारक ऊँचा खड़ा है और चारों ओर से हरी-भरी घाटी के नज़ारे वाले बगीचों से घिरा है। यह जगह जाने की कई सारी वजह है जैसे की, मेघालय के ब्रिटिश भारत में एकीकरण से जुड़े औपनिवेशिक इतिहास का प्रतीक है यह जगह। चेरापूंजी के हरे-भरे विस्तार के मनोहर दृश्य और लंबी पैदल यात्रा का आनंद लेने के लिए “डेविड स्टॉक मेमोरियल ट्रेल” पर चले।

अपनी यात्रा के दौरान आसपास के प्राकृतिक स्थल जैसे कि झरने गुफाएं और नदिया जरूर जाएं। अपनी सुरक्षा और बेहतरीन फोटोग्राफी के लिए दिन के समय में ही जाएं साथ ही स्थानीय गाइड को साथ रखें जिस वजह से आपको वहां की स्थानीय कथाएं भी जान ने मिलेगी।

(7) हांग्ने डाई गुफा:

मेघालय साहसिक और प्रकृति प्रेमियों, दोनों के लिए एक शानदार जगह है। चूना पत्थर की गुफाओं के अपने विशाल नेटवर्क के साथ, यह भूवैज्ञानिक चमत्कारों को रोमांचकारी अन्वेषण के साथ जोड़ता है। जोवाई के जराइन में स्थित हांग्ने डाई गुफा प्रणाली इस प्राकृतिक आश्चर्य का एक बेहतरीन उदाहरण है। अपनी मेघालय छुट्टियों में, भूवैज्ञानिक चमत्कारों के खजाने, हांग्ने डाई गुफा प्रणाली को देखना न भूलें। रोमांच चाहने वालों के लिए, इन गुफाओं की खोज एक अविस्मरणीय साहसिक कार्य है। संकरे रास्तों, चट्टानी इलाकों से गुज़रना और छिपे हुए कक्षों को खोजना एक रोमांचक रोमांच प्रदान करता है।

जोवाई में घूमने लायक सभी जगहों में से, मेघालय में स्थित हांग्ने डाई गुफा प्रणाली परम रोमांच प्रदान करती है! तो, आप किसका इंतज़ार कर रहे हैं? आइए और प्राचीन काल की यात्रा का अनुभव करने के लिए इस रत्न की खोज करें। हम आपको मेघालय में हांग्ने डाई गुफा प्रणाली के बारे में हर ज़रूरी जानकारी देने के लिए यहाँ मौजूद हैं। हांग्ने डाई गुफा प्रणाली के निर्देशित पर्यटन के साथ आप कुछ गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं:

I. गुफाओं का अन्वेषण करें: हांग्ने डाई गुफा प्रणाली में स्टैलेक्टाइट्स, स्टैलेग्माइट्स और स्तंभों जैसी आश्चर्यजनक संरचनाएँ हैं। निर्देशित पर्यटन आपको नेविगेट करने और सबसे आकर्षक विशेषताओं को खोजने में मदद करने के लिए उपलब्ध हैं।

II. इतिहास और संस्कृति के बारे में जानें: ये गुफाएँ स्थानीय अनुष्ठानों और समारोहों के लिए सदियों पुराना महत्व रखती हैं। गाइड इनके सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के बारे में जानकारी साझा कर सकते हैं।

III. गुफाओं की खोज करें: साहसिक लोगों के लिए, गुफाओं की खोज विभिन्न गुफा मार्गों से रेंगने, चढ़ने और रस्सी के सहारे नीचे उतरने का मौका देती है, जिससे उनकी गहराई का पता चलता है।

IV. झरनों को देखें: बारिश के मौसम में, गुफाओं के अंदर शानदार झरने दिखाई देते हैं। इन प्राकृतिक अजूबों को भूमिगत देखना एक ताज़ा दृश्य और एक अनूठा अनुभव है।

V. यादें संजोएँ: गुफाओं के अंदर की मनोरम संरचनाओं को कैद करने के लिए अपने कैमरे या तेज़ रोशनी वाले हेडलैंप को न भूलें।

VI. पक्षी-दर्शन: गुफाओं के आसपास विविध पक्षी प्रजातियों का निवास स्थान है। पक्षी-प्रेमियों को इस क्षेत्र में पक्षी-विविधता को देखने और उसका आनंद लेने के लिए दूरबीन साथ लानी चाहिए।

(8) वेई सावडोंग फॉल्स:

वेई सावडोंग फॉल्स मेघालय की चेरापूंजी के पास स्थित एक खूबसूरत तीन स्तरीय झरना है। इस झरने की सबसे खास बात यह है कि इसका रंग हरा है और चमकदार भी, साथ ही इसका अपनी बेहद साफ है जो ऊंची चट्टानों से गिरता है यह स्थान चेरापूंजी के सोहर क्षेत्र में डैंटलीन जलप्रपात के पास लगभग 58 किलोमीटर की दूरी पर है। इसकी सुंदरता और बेहद अद्भुत नजारे के कारण यह जगह मेघालय में घूमने की सबसे बेहतरीन जगह में से एक मानी जाती है। इसके नाम का भी बेहद बेहतरीन मतलब है जैसे कि “वेइ” का मतलब है “तालाब” और सब डोंग का मतलब “वर्गाकार” आकार होता है।

(9) एलीफेंट झरना:

मेघालय के लोकप्रिय झरनों में से एक, एलिफेंट फॉल्स एक त्रि-स्तरीय शानदार झरना है। शिलांग पीक के करीब स्थित, इस झरने को स्थानीय लोग ‘का क्षैद लाई पातेंग खोहस्यू’ कहते हैं, जिसका अर्थ है ‘तीन चरणों वाला झरना’। घने जंगलों के बीच बसा, शिलांग का एलिफेंट फॉल्स मानसून के मौसम के बाद, खासकर अक्टूबर से दिसंबर तक, बहुत खूबसूरत और मूसलाधार दिखता है।

अंग्रेजों ने इसका यह नाम झरने के तल पर स्थित एक विशाल चट्टान के कारण रखा था, जो देखने में हाथी के आकार की लगती है। हालाँकि, भूकंप में नष्ट हो जाने के बाद से यह चट्टान अब वहाँ नहीं है। शिलांग शहर से 12 किलोमीटर दूर स्थित, इस जगह पर पर्यटकों और स्थानीय लोगों का आना-जाना लगा रहता है, खासकर सप्ताहांत में।

(10) सेवन सिस्टर्स फॉल्स:

नोह्सिंगिथियांग जलप्रपात या मावसमाई जलप्रपात के नाम से प्रसिद्ध, यह सात चरणों वाला झरना है और मेघालय के सबसे खूबसूरत झरनों में से एक है। सेवन सिस्टर्स जलप्रपात खासी पहाड़ियों की चूना पत्थर की चट्टानों से 1033 फीट की ऊँचाई से गिरता है, जो इसे भारत के सबसे ऊँचे झरनों में से एक बनाता है। इन झरनों के पूरे प्रवाह को देखने के लिए, जुलाई और सितंबर के बीच इस झरने पर जाएँ। हरे-भरे जंगलों से घिरे, सात धाराओं में गिरते इस झरने की सुंदरता आपको निश्चित रूप से मंत्रमुग्ध कर देगी!

(11) किनरेम जलप्रपात:

चेरापूंजी के पास, थंगकारंग पार्क के अंदर स्थित, किनरेम जलप्रपात मेघालय के सबसे ऊँचे झरनों में से एक है। लगभग 1003 फीट की ऊँचाई से तीन स्तरों से होकर नीचे गिरता यह जलप्रपात भारत के सातवें सबसे ऊँचे जलप्रपातों में गिना जाता है।खासी पहाड़ियों के हरे-भरे जंगलों के बीच बसा, किनरेम जलप्रपात मानसून के बाद और सर्दियों के मौसम में अपनी मनमोहक सुंदरता बिखेरता है। यहाँ का एक प्रमुख आकर्षण पिलर रॉक या शिव रॉक है। स्थानीय रूप से खोह राम्हा या मोथोर्प के नाम से जाना जाने वाला यह विशाल जलप्रपात झरने के ठीक बगल में स्थित है और मेघालय के मैदानों का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है।

(12) नोहकलिकाई झरना:

नोहकलिकाई झरना भी मेघालय के खूबसूरत झरनों में से एक है, जो चेरापूंजी से 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह भारत का सबसे ऊँचा झरना है। पानी बहुत ऊँचाई से गिरता है और तेज़ी से एक गहरे कुंड का निर्माण करता है, जहाँ गर्मियों में पानी हरा और सर्दियों में नीला हो जाता है। ऊपर एक व्यूइंग गैलरी है और आप सीढ़ियाँ चढ़कर झरने और मनमोहक कुंड का विहंगम दृश्य देख सकते हैं।

(13) लांगशियांग झरना:

किंशी नदी पश्चिमी खासी पहाड़ियों से नीचे गिरकर लांगशियांग जलप्रपात बनाती है। लांगशियांग, जो बहुत लोकप्रिय नहीं है, मेघालय के सबसे विशाल झरनों में से एक है, जो नोंगस्टोइन के पास संगरियांग के हरे-भरे जंगलों के बीच स्थित है। ताज़गी भरी सुंदरता से भरपूर, इस जलप्रपात को स्थानीय रूप से ‘क्षैद उर-नार’ कहा जाता है और यह हरी-भरी पहाड़ियों और आसपास के गांवों की मनमोहक सुंदरता प्रस्तुत करता है। मावपोन गाँव से भी लांगशियांग जलप्रपात स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

(14) बिशप और बीडन झरना:

बिशप और बीडन मेघालय के सबसे शानदार जुड़वां झरनों में से एक हैं। बिशप जलप्रपात एक त्रि-स्तरीय जलधारा है जो लगभग 443 फीट की ऊँचाई से पूर्वी खासी पहाड़ियों से नीचे गिरती है। घने जंगलों के बीच स्थित, बीडन जलप्रपात आसपास के अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। बीडन जलप्रपात चट्टानी पहाड़ियों से गिरता है, जबकि बिशप जलप्रपात का झागदार पानी नीचे गिरकर एक गहरी खाई बनाता है। बिशप और बीडन दोनों जलप्रपात उमियम नदी की एक गहरी घाटी में गिरते हैं और सुरम्य सुना घाटी से होकर बहते हैं।

(15) थम झरना:

मेघालय के झरने बेहद खूबसूरत और जादुई हैं। थम फॉल्स उन लोगों के लिए एक बेहतरीन जगह है जो अपनी छुट्टियों में तरोताज़ा होना चाहते हैं। ये 60 मीटर ऊँचे झरने डिलिंगम गाँव के पास स्थित हैं और वाकई देखने लायक हैं। हरी-भरी हरियाली के बीच बसा इनका साफ़ पानी एक मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है जो अपनी ताज़गी और उपचारात्मक अनुभूतियों से भरपूर है। यहाँ एक छोटा सा तालाब है जो तीन तरफ से कठोर चट्टानों से घिरा है और एक दिन की पिकनिक के लिए आदर्श है।

नर्तियांग दुर्गा मंदिर जाने का बेहतरीन समय

आप किसी भी समय मंदिर जा सकते हैं परंतु मंदिर जाने के लिए बेहतरीन समय रहता है अक्टूबर से मार्च तक का क्योंकि इस समय सर्दियों के दौरान मेघालय का वातावरण अद्भुत हो जाता है। गुलाबी सर्दियों में मंदिर में दर्शन करना और उसके बाद मेघालय घूमने का अवसर आपको जरूर लेना चाहिए। साल में एक बार होने वाले दुर्गा पूजा के त्यौहार के दौरान भी आप मंदिर में जा सकते हैं। सितंबर से अक्टूबर के बीच यह त्यौहार होता है जिसमें कई सारी सांस्कृतिक गतिविधियां होती हैं।

नर्तियांग दुर्गा मंदिर जाने की सुविधा

हवाई मार्ग से:

निकटतम हवाई अड्डा असम के गुवाहाटी में स्थित लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो लगभग 180 किलोमीटर दूर है। हवाई अड्डे से, आप नार्तियांग पहुँचने के लिए टैक्सी या कार किराए पर ले सकते हैं, जिसमें यातायात के आधार पर लगभग 4-5 घंटे लगते हैं।

रेल मार्ग से:

निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन असम के गुवाहाटी में स्थित गुवाहाटी रेलवे स्टेशन है। वहाँ से आप नार्तियांग के लिए टैक्सी या कार ले सकते हैं।

सड़क मार्ग से:

नार्तियांग मेघालय और असम के अन्य हिस्सों से सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। आप शिलांग, गुवाहाटी या क्षेत्र के अन्य प्रमुख शहरों से नार्तियांग पहुँचने के लिए बस या कार किराए पर ले सकते हैं। श्री नार्तियांग दुर्गा मंदिर नार्तियांग के मुख्य शहर से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप चाहें तो टैक्सी, रिक्शा किराए पर ले सकते हैं या शहर से मंदिर तक पैदल भी जा सकते हैं।

नर्तियांग दुर्गा मंदिर के आसपास रहने और खाने की व्यवस्था

नरतियांग दुर्गा शक्ति पीठ मेघालय के जयंतिया हिल्स जिले में स्थित है। यहाँ का निकटतम प्रमुख शहर जोवाई है, जहाँ विभिन्न प्रकार के आवास और भोजन के विकल्प उपलब्ध हैं, जो मंदिर से लगभग 11-14 किमी दूर है।

नर्तियांग दुर्गा शक्तिपीठ मंदिर जाते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

इस अद्भुत मंदिर की यात्रा के दौरान एक सहज और आनंददायक अनुभव सुनिश्चित करने के लिए, श्री नरतियांग दुर्गा मंदिर की यात्रा के लिए कुछ सुझाव यहां दिए गए हैं:

विनम्र पोशाक पहनें: मंदिर की धार्मिक पवित्रता का सम्मान करते हुए, शालीन और उचित कपड़े पहनें। अपने कंधों और घुटनों को ढकें।

जूते: मंदिर परिसर में प्रवेश करने से पहले आपको अपने जूते उतारने होंगे। आसानी से उतारने योग्य जूते पहनना उचित है।

स्थानीय रीति-रिवाजों का सम्मान करें: स्थानीय रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन करें। अनुमति के बिना मूर्तियों या पवित्र वस्तुओं को छूने से बचें।

फ़ोटोग्राफ़ी: मंदिर परिसर के अंदर तस्वीरें लेने से पहले अनुमति लें। कुछ क्षेत्रों में प्रतिबंध हो सकते हैं।

दान और चढ़ावा: यदि आप दान करना चाहते हैं या प्रसाद चढ़ाना चाहते हैं, तो इन गतिविधियों के लिए निर्दिष्ट क्षेत्र हैं। मंदिर अधिकारियों द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों का पालन करें।

गाइड और जानकारी: मंदिर के इतिहास और महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए किसी स्थानीय गाइड को नियुक्त करने या मंदिर के पुजारी से पूछने पर विचार करें।

धार्मिक अनुष्ठान: श्री नर्तियांग दुर्गा मंदिर के धार्मिक अनुष्ठानों में सम्मान और समझदारी से भाग लें।

अनुष्ठान: श्री नर्तियांग दुर्गा मंदिर के अनुष्ठान पुजारियों या मंदिर अधिकारियों के निर्देशानुसार करें। निर्धारित प्रक्रियाओं और समय का पूरी ईमानदारी से पालन करें।

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